दिलो जान से दोनों क़बूल हैं

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कभी धूप दे… कभी बदलियाँ;
दिलो जान से दोनों क़बूल हैं;
मगर उस नगर में न कैद कर;
जहाँ जिंदगी की हवा न हो।

बादलों अब तो बरस जाओ सूखी जमीनों पर

Hindi Barish Shayari

जमीन जल चुकी है आसमान बाकी है,
दरख्तों तुम्हारा इम्तहान बाकी है!!

बादलों अब तो बरस जाओ सूखी जमीनों पर,
किसी का मकान गिरवी है और किसी का लगान बाकी है!!!