लोग जलते रहे मेरी मुस्कान पर

लोग जलते रहे मेरी मुस्कान पर;
मैंने दर्द की अपने नुमाईश न की;
जब जहाँ जो मिला अपना लिया;
जो न मिला उसकी ख्वाहिश न की!!

मुझको तो दर्द-ए-दिल का मज़ा याद आ गया

मुझको तो दर्द-ए-दिल का मज़ा याद आ गया;
तुम क्यों हुए उदास तुम्हें क्या याद आ गया…?

कहने को जिंदगी थी बहुत मुख्तसर मगर;
कुछ यूँ बसर हुई कि खुदा याद आ गया!!

Khushi Wear

हमारी तन्हाइयों से भी आँख चुराते रहे

वो तो अपना दर्द रो-रो कर सुनाते रहे;
हमारी तन्हाइयों से भी आँख चुराते रहे;
हमें ही मिल गया खिताब-ए-बेवफा क्योंकि;
हम हर दर्द मुस्कुरा कर छुपाते रहे!!

हँसते हुए ज़ख्मों को भुलाने लगे हैं हम

Dard Bhari Shayari Image

हँसते हुए ज़ख्मों को भुलाने लगे हैं हम;
हर दर्द के निशान मिटाने लगे हैं हम।

अब और कोई ज़ुल्म सताएगा क्या भला;
ज़ुल्मों सितम को अब तो सताने लगे हैं हम।।