काश उन्हें चाहने का अरमान नही होता

काश उन्हें चाहने का अरमान नही होता;
में होश में होकर भी अंजान नही होता;
ये प्यार ना होता किसी पत्थर दिल से;
या फिर कोई पत्थर दिल इंसान ना होता ||

Khushi Wear

हाथ पकड़ कर रोक लेते अगर

हाथ पकड़ कर रोक लेते अगर;
तुझ पर ज़रा भी ज़ोर होता मेरा;
ना रोते हम यूँ तेरे लिये;
अगर हमारी ज़िन्दगी में;
तेरे सिवा कोई ओर होता !!

कभी उसने भी हमें चाहत का पैगाम लिखा था

कभी उसने भी हमें चाहत का पैगाम लिखा था;
सब कुछ उसने अपना हमारे नाम लिखा था;
सुना है आज उनको हमारे जिक्र से भी नफ़रत है;
जिसने कभी अपने दिल पर हमारा नाम लिखा था ।।

तकलीफो का कारवाँ इतनी धूम से निकला

तकलीफो का कारवाँ इतनी धूम से निकला;
हर जख्म की आह पे आँखों से आँसू निकला;
बदन से रूह रुखसत हो सकी ना;
कहने को मेरी मय्यत पे सारा जहा साथ निकला !!

शाम खामोशी में ढलती रही

शाम खामोशी में ढलती रही;
हम तन्हाई में चलते रहे.

कभी हंसते खुद के नसीब पे;
तो कभी अंदर ही अंदर रोते रहे.

कभी शिकवा तो कभी ठोकेर मिली;
फिर भी हम उनसे मोहब्बत करते रहे.

हम जितना जाते रहे उनके पास;
वो बेवफा उतना ही हम से दूर होते रहे..!!