मेरी फिक्र में खुद को भूल जाती हो

Love Shayari

मेरी फिक्र में खुद को भूल जाती हो; और बेखबर हो मुझ को ये जताती हो;
होने लगती हो जिस पल दूर मुझसे; कसम से उस पल बहुत याद आती हो;
चाहती हो कितना, पूछू जब कभी तो; आँखों ही आँखों में सब कुछ बताती हो;
मोहब्बत में मेरी खुद को भुलाए बैठी हो; और दिल में अपने जज़्बात छुपाती हो।

तेरी खुशियों पर मुस्कराने को जी चाहता है

तेरी खुशियों पर मुस्कराने को जी चाहता है; हो तुझे दर्द तो उदास होने को जी चाहता है;
तेरी मुस्कुराहट ही इतनी प्यारी है की; तुझे बार-बार हसाने को जी चाहता है!!