दर्द गूंज रहा दिल में शहनाई की तरह

दर्द गूंज रहा दिल में शहनाई की तरह;
जिस्म से मौत की ये सगाई तो नहीं;
अब अंधेरा मिटेगा कैसे…
तुम बोलो तूने मेरे घर में शम्मा जलाई तो नहीं…!!

हमारी तन्हाइयों से भी आँख चुराते रहे

वो तो अपना दर्द रो-रो कर सुनाते रहे;
हमारी तन्हाइयों से भी आँख चुराते रहे;
हमें ही मिल गया खिताब-ए-बेवफा क्योंकि;
हम हर दर्द मुस्कुरा कर छुपाते रहे!!

मेरी जिंदगी की कहानी भी बड़ी मशहूर हुई

मेरी जिंदगी की कहानी भी बड़ी मशहूर हुई;
जब मैं भी किसी के ग़म में चूर हुई;
मुझे इस दर्द के साथ जीना पड़ा;
कुछ इस कदर मैं वक़्त के हाथों मजबूर हुई।

मैंने जिसे भी चाहा अपना बनाना;
सबसे पहले वही चीज मुझसे दूर हुई;
एक बार जो गए फिर कहाँ मिले वो लोग;
जिनके बिना मेरी जिंदगी बेनूर हुई।।

मेरी जिन्दगी को तन्हाई ढूँढ लेती है

मेरी जिन्दगी को तन्हाई ढूँढ लेती है;
मेरी हर खुशी को रुसवाई ढूँढ लेती है;
ठहरी हुई हैं मंजिलें अंधेरों में कबसे;
मेरे जख्म को गमे-जुदाई ढूँढ लेती है!!

वो बेवफा हमारा इम्तेहा क्या लेगी

वो बेवफा हमारा इम्तेहा क्या लेगी;
मिलेगी नज़रो से नज़रे तो अपनी नज़रे ज़ुका लेगी;
उसे मेरी कबर पर दीया मत जलाने देना;
वो नादान है यारो अपना हाथ जला लेगी।।