मुकम्मल है इबादत और मैं वतन ईमान रखता हूँ

मुकम्मल है इबादत और मैं वतन ईमान रखता हूँ;
वतन के शान की खातिर हथेली पे जान रखता हूँ!

क्यु पढ़ते हो मेरी आँखों में नक्शा पाकिस्तान का;
मुस्लमान हूँ मैं सच्चा, दिल में हिंदुस्तान रखता हूँ!!

संस्कार और संस्कृति की शान मिले ऐसे

संस्कार और संस्कृति की शान मिले ऐसे;
हिन्दू मुस्लिम और हिंदुस्तान मिले ऐसे;
हम मिलजुल के रहे ऐसे की मंदिर में अल्लाह;
और मस्जिद में राम मिले जैसे….

मैं भारत बरस का हरदम अमित सम्मान करता हूँ

मैं भारत बरस का हरदम अमित सम्मान करता हूँ;
यहाँ की चांदनी मिट्टी का ही गुणगान करता हूँ;
मुझे चिंता नहीं है स्वर्ग जाकर मोक्ष पाने की;
तिरंगा हो कफ़न मेरा, बस यही अरमान रखता हूँ।
– – Vande Mataram