हँसते हुए ज़ख्मों को भुलाने लगे हैं हम

Dard Bhari Shayari Image

हँसते हुए ज़ख्मों को भुलाने लगे हैं हम;
हर दर्द के निशान मिटाने लगे हैं हम।

अब और कोई ज़ुल्म सताएगा क्या भला;
ज़ुल्मों सितम को अब तो सताने लगे हैं हम।।

Hanste hue zakhmon ko bhoolane lage hain ham;
Har dard ke nishan mitane lage hain ham…!

Ab aur koi zoolm sataega kya bhala;
Zulmon sitam ko ab to sataane lage hain ham…!!