शाम खामोशी में ढलती रही

शाम खामोशी में ढलती रही;
हम तन्हाई में चलते रहे.

कभी हंसते खुद के नसीब पे;
तो कभी अंदर ही अंदर रोते रहे.

कभी शिकवा तो कभी ठोकेर मिली;
फिर भी हम उनसे मोहब्बत करते रहे.

हम जितना जाते रहे उनके पास;
वो बेवफा उतना ही हम से दूर होते रहे..!!

Khushi Wear