दर्द क्या होता है बताएँगे किसी रोज़

दर्द क्या होता है बताएँगे किसी रोज़,
कमाल की ग़ज़ल तुम को सुनायेंगे किसी रोज़।

थी उन की ज़िद के मैं जाऊँ उन को मनाने,
मुझ को ये वहम था वो बुलाएंगे किसी रोज़।

उड़ने दो इन परिंदों को आज़ाद फ़िज़ाओं में,
तुम्हारे होंगे अगर, तो लौट आएंगे किसी रोज़।

Khushi Wear